तृप्ति,
होने में नही,
मिट जाने में है
केवल "मैं" के मिटने में नहीं
"हम" के मिट जाने में भी
मिटना मृत्यु नही है
मिटना है अस्तित्व के तल पर
निपट खालीपन,
प्रकृति के कोष्ठक में
निर्वाण लालीपन
शून्यता की ऐसी स्थिति
पैदा करती है दृष्टि
दृष्टि,
जो किन्ही काल-खण्डों में परिभाषित नही है
और न ही किन्ही नियमो में सीमित
नैतिकता जिसके लिए दम्भ है
और अनैतिकता भ्रम
जिसमे न गांठ सी अकड़ है
और न महत्वकांक्षा की पकड़
विचारो से परे
ये हैं तो बस "दृष्टि"
अस्तित्व का सूचक !
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【Click - Dalai Lama Temple, McLeoddunj, Dharmshala】
होने में नही,
मिट जाने में है
केवल "मैं" के मिटने में नहीं
"हम" के मिट जाने में भी
मिटना मृत्यु नही है
मिटना है अस्तित्व के तल पर
निपट खालीपन,
प्रकृति के कोष्ठक में
निर्वाण लालीपन
शून्यता की ऐसी स्थिति
पैदा करती है दृष्टि
दृष्टि,
जो किन्ही काल-खण्डों में परिभाषित नही है
और न ही किन्ही नियमो में सीमित
नैतिकता जिसके लिए दम्भ है
और अनैतिकता भ्रम
जिसमे न गांठ सी अकड़ है
और न महत्वकांक्षा की पकड़
विचारो से परे
ये हैं तो बस "दृष्टि"
अस्तित्व का सूचक !
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