Monday, December 28, 2015

अब हम एक हो जाएंगे।

आओ एक खेल-खेलें

तुम अपनीे आँखें बंद करो
और मैं बंद करता हूँ अपनी

अपना हाथ मेरी हथेली में दो

उतरो अपने भीतर धीरे-धीरे 
मैं भी उतरता हूँ 
अँधेरा घनघोर है भयभीत नही होना
मैं भी संभलता हूँ
शब्द बाँधा है कुछ बोलना नही 
मैं भी साध रहा हूँ मौन
तुम्हारा जो भी है सब खोने दो
मैं भी झाड़ता हूँ अपने मन की धुल
अब सुनो संगीत मेरे ह्रदय का
मैं भी सुनता हूँ तुम्हारे आत्मा के गीत
महसूस करो उस चैतन्य को जो समाहित हैं तुममे
मैं महसूस करता हूँ तुम्हे

अब ढूंढो खुद को
मैं भी ढूंढता हूँ

फिर ?

तुम पा लोगी मुझे और मैं तुम्हे पा लूंगा
अब हम एक हो जायेंगे।
➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖

No comments:

Post a Comment