Monday, December 28, 2015

तुम्हरा प्रेम !

तुम्हारा प्रेम,
ज़रूरत नहीं है मेरी
न ही मेरे जीवन के
गहरे अवसादों से
उबरने का साधन
तुम्हारा प्रेम,
मेरे जख़्मों के लिए
मरहम नही है
न ही मेरे जलते बदन के लिए
ठंडक
तुम्हारा प्रेम,
मेरे वीरान घड़ी का
साथी भी नही
मेरी बेमतलब की जरूरतों का
पोषक नहीं है तुम्हारा प्रेम
क्योंकि
तुम्हारा प्रेम
मांग नहीं है मेरी
_
तुम्हारा प्रेम
परम आनद है मेरा
तुम्हारा प्रेम हैं
आकाशगंगाओ की सैर
तुम्हारा प्रेम उत्सव है
मेरे जीवन का,
मेरी आत्मा का
पोषण है तुम्हारा प्रेम
तुम्हारा प्रेम
मेरा सौभाग्य है
_
ग़र तुम देना चाहती हो प्रेम
प्रेम के बदले में
या अभागा समझकर
तो मत देना कभी
क्योंकि,
तुम्हारा प्रेम बन जायेगा बोझ
और मेरा प्रेम पश्चाताप।।
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French translation -:

Ton amour,
Ton amour n'est pas mon besoin
Ni un outil de guérison
De Mon profond chagrin
Ton amour,
N'est pas une pommade
Pour mes blessures
Ni de la fraîcheur
Pour mon corps brûlant
Ton amour,
N'est pas un compagnon
Dans mes périodes de solitude
Ton amour,
n'est pas satisfaction
Pour mon désir vide de sens
Parce que
Ton amour n'est pas ma demande
_
Ton amour,
Il est ma joie ultime
Ton amour est excursion dans la galaxie
Ton amour,
Il est célébration de ma vie.
Ton amour,
Il est la nourriture pour mon âme
Ton amour est mon destin
-
Si tu veux me donner de l'amour
en retour du mien
Juste car tu me vois malheureux
alors ne le donne jamais
Parce que
Ton amour deviendra fardeau
Et mon amour deviendra remord.
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संवेदनशील !

मौत से ज्यादा संवेदनशील है भूख़
मौत से ज्यादा संवेदनशील है बेवकूफ़ी
मौत से ज्यादा संवेदनशील है शोषण
मौत से ज्यादा संवेदनशील है आत्मा का विलाप
माफ़ कीजियेगा
इस भीषण कोलाहल में,
मौत अब संवेदनशील नहीं रही।




तृप्ति !

तृप्ति,
होने में नही, 
मिट जाने में है
केवल "मैं" के मिटने में नहीं
"हम" के मिट जाने में भी
मिटना मृत्यु नही है
मिटना है अस्तित्व के तल पर
निपट खालीपन,
प्रकृति के कोष्ठक में
निर्वाण लालीपन
शून्यता की ऐसी स्थिति
पैदा करती है दृष्टि
दृष्टि, 
जो किन्ही काल-खण्डों में परिभाषित नही है
और न ही किन्ही नियमो में सीमित
नैतिकता जिसके लिए दम्भ है
और अनैतिकता भ्रम
जिसमे न गांठ सी अकड़ है
और न महत्वकांक्षा की पकड़
विचारो से परे
ये हैं तो बस "दृष्टि"
अस्तित्व का सूचक !
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अब हम एक हो जाएंगे।

आओ एक खेल-खेलें

तुम अपनीे आँखें बंद करो
और मैं बंद करता हूँ अपनी

अपना हाथ मेरी हथेली में दो

उतरो अपने भीतर धीरे-धीरे 
मैं भी उतरता हूँ 
अँधेरा घनघोर है भयभीत नही होना
मैं भी संभलता हूँ
शब्द बाँधा है कुछ बोलना नही 
मैं भी साध रहा हूँ मौन
तुम्हारा जो भी है सब खोने दो
मैं भी झाड़ता हूँ अपने मन की धुल
अब सुनो संगीत मेरे ह्रदय का
मैं भी सुनता हूँ तुम्हारे आत्मा के गीत
महसूस करो उस चैतन्य को जो समाहित हैं तुममे
मैं महसूस करता हूँ तुम्हे

अब ढूंढो खुद को
मैं भी ढूंढता हूँ

फिर ?

तुम पा लोगी मुझे और मैं तुम्हे पा लूंगा
अब हम एक हो जायेंगे।
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अधखुले द्वार।

एक कोशिश - शब्दों के द्वारा अभिव्यक्ति की 
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वे अधखुले द्वार
जहाँ से बाहर निकलने की उमंग
और भीतर रह जाने की निराशा
प्रतिक्षण बदलता प्रतिबिम्ब

द्वार के उस पार
है अनंत विस्तार
जीवन,रंग और उत्सव
सत्य जहाँ अनुभव है
कोई नियम नहीं
प्रकृति पर्याप्त है जहाँ
अस्तित्व को समझने के लिए

द्वार के इस पार
है घुटन,अंधकार और कुंठित विचार
सत्य यहाँ नियम है
ठोस, शुष्क और मृत
अस्तित्व की पहेली क़ैद है यहाँ
किन्ही पुस्तको में, विचारो में

मर चुकी है मनुष्यता
अधखुले द्वार के भीतर 
झूठे सत्य की तलाश में

झूठे, थोपे हुए सत्य 
पैदा करते है द्वंद
और उस द्वंद से उपजा संघर्ष
बन जाता है घर्षण
जो केवल घिसता है और खो जाता है

द्वार अभी भी अधखुला है

नही, अब द्वार खोलना होगा
आधा नही, पूरा-पूरा 
और जाननी होगी सत्य की स्थिति
द्वार के इस पार या द्वार के उस पार
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【Pic - Thomas Kinkade's painting "The open gate"】