Thursday, February 14, 2019

कोई कविता बुरी नही होती।

कोई कविता बुरी नही होती

शब्द हल्के हो सकते हैं
भाव कच्चे हो सकते हैं
लय-छंद बिखरे हो सकते हैं
लेकिन कविता बुरी नही हो सकती

कि तुम्हारे भीतर से कुछ फूटा तो सही
कच्चा-पक्का कुछ टूटा तो सही
ये टूटना शुभ है

कहीं ऐसा तो नही
जिसे संजोया है इतने जतन से
वही मन पे भार बना बैठा हो
जिसे तुमने समझा बेकार-बेतुका
वही जीवन का सार बना बैठा हो

जरूरी तो नही
जिसे प्रेम किया तुमने
वह भी तुम्हे चाहे उसी अनुपात में
जिसे जाने दिया तुमने
लौट आए किसी घनघोर अंधेरी रात में

जो इक्कठा किया है भीतर
उसे टूटना तो होगा
चैतन्य को पीना है तो
भावो को फूटना तो होगा

माना कि तुम्हारे लिखे पर कोई दाद न दे
तुम्हारे शब्दों को, भावो को खाद न दे
तो क्या मौन संगीत में झूमोगे नहीं
कविताओं में ही सही
क्या उसका माथा चूमोगे नही

मन पे जो भार है उसे पन्नों पर उतार दो
लय की फिक्र छोड़ो जो आता है बघार दो

कि कोई कविता बुरी नही होती।

@दिग्विजय


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