मैं चाहता हूं हर चीज़ एक समय के बाद नष्ट हो जाए
न रहे उसकी कोई महक, सुवास
मर जाए घृणा, द्वेष यहां तक कि प्रेम भी
की मृत्यु को हमने अपमानित भर किया है
मरना होगा उसे, क्योंकि देना होगा पुरातन को नया प्रतिमान
नष्ट हो जाए, ताकि बची रहे उसकी सुंदरता
कि नष्ट होना प्रमाणिक है
और मृत्यु शाश्वत
मैं होना चाहता हूं कुछ ऐसा
जो एक भरपूर सांस लेने के बाद हो जाए निढाल
मेरे भीतर एक गहरा खालीपन है
और जरूरी नहीं उसे भरना
@दिग्विजय
न रहे उसकी कोई महक, सुवास
मर जाए घृणा, द्वेष यहां तक कि प्रेम भी
की मृत्यु को हमने अपमानित भर किया है
मरना होगा उसे, क्योंकि देना होगा पुरातन को नया प्रतिमान
नष्ट हो जाए, ताकि बची रहे उसकी सुंदरता
कि नष्ट होना प्रमाणिक है
और मृत्यु शाश्वत
मैं होना चाहता हूं कुछ ऐसा
जो एक भरपूर सांस लेने के बाद हो जाए निढाल
मेरे भीतर एक गहरा खालीपन है
और जरूरी नहीं उसे भरना
@दिग्विजय

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