Thursday, July 2, 2020

इरफ़ान और सुशांत को श्रध्दाजंलि

मृत्यु भद्दी नही होती, पत्ते सूख जाने के बाद निर्द्वन्द लहराते हुए गिरतें हैं. पेड़ अपनी उम्र पूरी करने के बाद धरती पर ऐसे उतरते है जैसे थक जाने के बाद मां की गोद में विश्राम करने जा रहे हों।
वह एक सुंदर क्षण होता है। एक लम्बी यात्रा के बाद विराम बिंदु पर पहुंचने की शांति होती है। एक ठहराव का सुख होता है।
उस गिरने में एक सौंदर्य है।
उसे 'गिरना' कहना ठीक भी नही।

भद्दा है हरे पत्ते का डाल से टूट जाना,
एक हरे उदात्त वृक्ष का धरती पर बिखर जाना.
ये भार असहनीय होती है, और अगर वृक्ष अद्वितीय हो तो धरती के कोर तक को बेध देती है।

🌼इरफ़ान और सुशांत को श्रद्धांजलि🌼



No comments:

Post a Comment